शनिवार, 31 जनवरी 2009

घोड़ा साईं

daudnagar में एक मजार है जहाँ हिंदू और मुसलमान समान श्रधा से जाते हैं । यहाँ दो मजार हैं । एक नवाब साहेब का है और दूसरा उनके घोड़े का । नवाब साहेब दुश्मनों का मुकाबला करते हुए घायल हो गए थे। उनका वफादार घोड़ा उनके शरीर को वापस शहर ले आया । घोड़ा भी घायल हो गया था। दोनों शहीद हो गए और दोनों का मजार दो जगहों पर स्थापित हैं । घोड़ा साईं का मजार काफी मशहूर है और हरेक साल यहाँ उर्स होता है । लोगों का मानना है की वे सभी मुरादें पूरी करते हैं। कुछ साल पहले मै जब वहां गया था तो एक हिंदू ने मुझसे पूजा कराई। घोड़ा साईं का मजार धर्म से ऊपर धार्मिक सद्भावना का प्रतीक है और एक यह प्रतीक है वफादारी का वह भी एक जानवर का जो लोगों की नजरों में भगवन है ।

1 टिप्पणी:

  1. प्रकृति ने हमें केवल प्रेम के लिए यहाँ भेजा है. इसे किसी दायरे में नहीं बाधा जा सकता है. बस इसे सही तरीके से परिभाषित करने की आवश्यकता है.
    ***वैलेंटाइन डे की आप सभी को बहुत-बहुत बधाइयाँ***
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    'युवा' ब्लॉग पर आपकी अनुपम अभिव्यक्तियों का स्वागत है !!!

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